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Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar and Anr - Court Judgment

LegalCrystal Citation
CourtRajasthan - Jodhpur High Court
Decided On
AppellantFirm Delux Rest House
Respondent Prem Kumar and Anr
Excerpt:
s.b. civil second appeal no.208/2009 firm delux rest house vs. prem kumar & anr. judgment, tuesday, 08/09/2015 1 of 19 in the high court of judicature for rajasthan at jodhpur ::: judgment ::: s. b. civil second appeal no.208/2009 firm delux guest house through its partner hukum chand, bikaner vs.1. prem kumar s/o lakhuram, by caste khatri 2. suresh kumar sharma, advocate. date of judgment ::: tuesday, 08th sept.2015. present hon'ble dr. justice vineet kothari mr. varun goyal, for the appellant/defendant/tenant. mr. hemant balani and mr. v.d. vaishnav, for the respondent no.1/plaintiff/landlord. mr. jitendra kumar sharma, for the respondent/defendant no.2. (sub-tenant) -- by the court (oral):1. the present second appeal has been filed by the appellant/defendant/tenant, firm delux guest.....
Judgment:

S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 1 of 19 IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN AT JODHPUR :::

JUDGMENT

::: S. B. CIVIL SECOND APPEAL No.208/2009 Firm Delux Guest House through its Partner Hukum Chand, Bikaner Vs.

1. Prem Kumar S/o Lakhuram, by caste Khatri 2. Suresh Kumar Sharma, Advocate. Date of Judgment ::: Tuesday, 08th Sept.

2015. PRESENT HON'BLE Dr. JUSTICE VINEET KOTHARI Mr. Varun Goyal, for the appellant/defendant/tenant. Mr. Hemant Balani and Mr. V.D. Vaishnav, for the respondent No.1/plaintiff/landlord. Mr. Jitendra Kumar Sharma, for the respondent/defendant No.2. (Sub-tenant) -- BY THE COURT (ORAL):

1. The present second appeal has been filed by the appellant/defendant/tenant, Firm Delux Guest House, Bikaner aggrieved by the judgment and eviction decree dated 28.11.2008 passed by learned Additional District Judge No.4, Bikaner, dismissing defendant's Appeal No.17/1998-Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr., and upholding the eviction decree granted by the learned Civil Judge (Jr. Divison) and Judicial Magistrate, First S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 2 of 19 Class, Bikaner, vide judgment dated 09.02.1998 under the provisions of Rajasthan Premises (Control of Rent and Eviction) Act, 1950 (for brevity, hereinafter referred to as 'Act of 1950') decreeing plaintiff's Suit No.136/1988-Prem Kumar Vs. Firm Delux Rest House & Anr., which was filed with respect to suit premises, which was let out to the defendant/tenant owner of Delux Rest House for residential purpose under oral tenancy created in the year 1988, however, the defendant in turn has sublet the same to the second respondent, Mr. Suresh Kumar Sharma, an Advocate, who established his office in the suit premises.

2. The relevant findings of the first appellate court in the order dated 28.11.2008 are quoted herein below for ready reference:- “तनक स. त न 16. इन तनक क ससद भ र व द -पत र स.1 पर र और वव. अ. न ल न इन तनक क ननर भ वद क पक म# ह कक ह& । इस सबध म# व द न अपन व द पत म# ह पकट कक ह& कक ववव ददत पररसर पनतव द स.1 (अप ल र ) क. उसक ररह श उपभ.ग, उप .ग क सलए दद ग र , ककत3 उसन इस पनतव द स.2 स3रश क3म र क. सबलट कर दद , जह 5 पर पनतव द स.2 न अपन वक लत क ऑक7स वह 5 पर ख.ल सल ह&। इस सबध म# पनतव द गर क ओर स इस सबध म# सपष रप स खण>न नह कक ग ह& । व द क ओर स इस सबध म# व दपत क चरर स.4 म# असभवचन सल ग र और पनतव द गर न अपन जव बद व@ म# कवल इतन अककत कक ह& कक '' ह कक व दपत क ध र 4 जजस तरह स ब न क गई ह&, सव क र नह ह& ।'' ह कक व दपत क ध र 4 जजस तरह स ब न क गई ह& , सव क र नह ह& ।'' एव ''व दपत क चरर स.4 सव क र S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 3 of 19 नह ह& ।'' ऐस जसरनत म# इस तथ क सपष खण>न भ उनक द र जव बद व@ म# नह कक ग ह& । ववशष करन म# इतन अवश सलख ग ह& कक ज द द सबलट अरव प टववर पजसन नह क ग ह& । पकक र@ क असभवचन@ क. दवषगत रखत ह3ए दद उनक स क पर ववच र कक ज व त. गव ह प >बK L1लख3र म न करन कक ह& कक पनतव द स.1 द र स3रश क3म र शम क. ववव ददत पररसर 300 र. पनतम ह ककर पर द दद ग ह&, जजसम# सरश क3म र शम वक ल क दफतर लग ह3आ ह& । ह कमर पनतव द न उसस पछ L कर स3रश शम वक ल क. ककर पर नह दद ह& । इस सबध म# ववजजदटग क > पदश-4 भ पश कक ग ह&, जजसम# पनतव द स.2 क पत ववव ददत पररसर क दद ग ह& । व द स क प >बK L2क3दन ल ल न भ ह करन कक ह& कक व दगसत कमर म# स3रश क3म र शम वक ल क ऑक7स ह& , जजसम# उसन वक ल स हब क. ब&ठ ह3ए दख ह& और उनक ऑक7स क ब हर नमपलट लग ह3ई ह& । गव ह क अन3स र आठ-दस स ल@ स उक वक ल क ह 5 पर ऑक7स ह& । इसक अन3स र जब वह अपन द.सत क स र ववव ददत कमर म# ग त. वह 5 वक ल स हब ब&ठ र, उनस र लन र । उनह@न ववजजदटग क > दद र , ज. पदश-4 ह.न बतल ग ह& । पनतव द गर न इस सबध म# अपन असभवचन@ म# ह भ कह ह& कक व दगसत पररसर रसट ह ऊस चल न क सलए व वस न क प .ग हत3 ककर पर सल ग र , क @कक इस कमर क नजद क ह पनतव द स.1 क ह.टल ह& । इस सबध म# पनतव द गर क स क पर दवषप त कक ज व त. उनह@न असभवचन@ क ब हर ज कर ह कह ह& कक व सतव म# व दगसत पररसर म# स3रश क3म र क कबज त. ह&, ककत3 ह कमर पनतव द न उसक. उपककर द र पर नह कक ह&, बजKक 8 र. पनतददन क दहस ब स रहन क सलए दद ग ह& । चLकक ह.टल म# र.ज ग हक आत ह& और रहत ह& अत: इस उपककर द र नह मन ज सकत । इस गव ह न अर त > >बK L1S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 4 of 19 भगव नद स न जजरह म# ह करन कक ह& कक वव ददत कमर ह.टल क सल सल र , ररह श क उपभ.ग क सलए नह सल ग र । ककर क क.ई सलख पढ नह ह3ई और ह कमर 15-16 स ल@ स पनतव द स.2 क प स ह&, जजसक रस द दकर ककर सल ज त रह ह& । रस द द. पडत म# ह.त ह& , परत3 गव ह क अन3स र वह रस द ब3क स र नह ल ह& । इस गव ह न ह भ कह ह& कक ककर स ल, छ: म ह, एक म ह म# अपन स3ववध नस 3 र दत ह& । पनतव द स.2 क. ककर शद 3 पररसर बबन सलख पढ क दद र , रजजसटर म# हसत कर करक दद ग र , रजजसटर उसक ऑक7स म# ह& , परत3 पनतव द क ओर स ऐस ककस रजजसटर क. स क म# पश नह कक ग ह& । इस कम म# ऐस ककस रजजसटर क सक म# पश नह कक ग ह&। इस कम म# > >बK L02स3रश क3म र न भ ऐस ह करन म3ख पर क म# कक ह& कक उसन पनतददन क दहस ब स ह कमर सल ह& । इसन ककस रजजसटर म# इस सबध म# इद ज स इक र कक ह&, जबकक भगव नद स ऐस करन कर रह ह& । ह उKलख करन उचचत ह.ग कक ह सब स क पनतव द गर क असभवचन@ स ब हर क स क ह&, जजस ववचधत: सव क र ह नह कक ज सकत । इसक अनतररक पनतव द क ओर स इस सबध म# क.ई रस द अरव रजजसटर आदद भ पश नह कक ग ह& । ववजजदटग क > पदश-4 स भ पनतव द स.2 क ऑक7स ववव ददत पररसर म# ह.न ससद ह. रह ह&। पनतव द क ओर स ऐस स क भ स3दढ रप स नह आ प ह& कक ह पररसर व वस न क प .जन हत3 ककर पर सल ग ह., जबकक व द क स क म# ह पकट ह. रह ह& कक ननज रहव स क सलए ह कमर पनतव द न उसस ककर पर सल र । पनतददन क दहस ब स ककर दन क कह न ब द क सLझ ह& , ज. असभवचन@ स ब हर क स क ह.न स ववचध अन3स र सव क र .ग नह ह& । 17. द`र न बहस वव. अचधवक अप ल र क म3ख तक ह रह ह& कक सव कaत रप स पनतव द स.2 स3रश क3म र S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 5 of 19 ववगत 15-16 स ल@ स ववव ददत पररसर पर क बबज ह&। उस अप ल र द र ह कमर उपककर द र पर नह दद ग ह& , बजKक 8 र. पनतददन क दहस ब स रहन क सलए दद ग ह& । इसक अनतररक भ सव व द -पत र स.1 क आचरर इस पक र ह& कक उस कबज हसत नतरर क 15-16 स ल@ स ज नक र र , लककन उसक उपर त भ उसन इस सदभ म# कभ क.ई क व ह नह क , ज. उसक म`न सव कaनत क. पररलककत करत ह& । ऐस जसरनत म# अप ल र क. उपककर द र पर पररसर दन क अरव पररसर क कबज प ट ववर पजशन करन क द.ष नह म न ज सकत । इस सबध म# उनह.न उक वररत नज र@ क ओर न ल क ध न आकaष कक ह& । 17 ब . हमन उक तकe क ववच र कक एव इस सबध म# पसतत 3 नज र@ स म गदशन प प कक । सव अप ल र - पनतव द स.1 द र पसतत 3 नज र@ क अवल.कन स ववचध क ह जसरनत सपष ह.त ह& कक र जसर न पररसर (ककर , नन तर एव बदखल ) अचधनन म क तहत उपककर द र क. स बबत करन हत3 भ-L सव म क. द. तथ स बबत करन ह@ग। परम तथ ह ह& कक उपककर द र क. ववव ददत पररसर क तनह कबज स3प3द कर दद ग ह. तर ददत तथ ह कक उपककर द र एव मLल ककर द र क मध ककर द र एव भ-L सव म /लस एव लसर क सबध ह.। वव. अचधवक पत र स.1 व द द र ज. नज र# 1998 (1) 494, म&. भ रत सKस सल. बन म एल आई स इड> तर 2005 (1) ए स ज 212 ज.चगनदर ससह स.ढ बन म अमर क`र पसत3त क ग ह&, उनक अवल.कन स भ ववचध क ह जसरनत सपष ह.त ह& । उक ववचधक जसरनत क. दवषगत रखत ह3ए व द क ओर स इस पकरर म# उक पक र क सक स ह स बबत कर दद ग ह& कक ववव ददत पररसर क तनह कबज स3रश क3म र शम ए>. क प स ह& , उनह# पनतव द स.1 द र स3प3द कर दद ग ह& । पनतव द स.1 न ककर पर पररसर दन स त. इक र कक ह&, परत3 ह कह ह& कक 8 र. पनतददन क S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 6 of 19 दहस ब स ह पररसर पनतव द स.2 क. दद ह3आ ह&, क.ई ककर पर नह दद ग ह&, परत3 इस सबध म# उसन रस द, रजजसटर क ववदम नत ह.त ह3ए भ उक पलख पश नह कक हj। ऐस जसरनत म# ववचधत: ह म न ज वग कक पनतव द स.1 व पनतव द स.2 क मध भ-L सव म (लसर) एव ककर द र (लस ) क सबध ह& । 18. जह 5 तक म`न सव कaनत क सबध ह& त. सवपरम ह सपष कर दन उचचत ह.ग कक पनतददन रहन क दहस ब स ज. स क अप ल र क ओर स पश ह3ई ह&, वह सपष रप स जव बद व म# सल ग असभवचन@ स सवर ब हर क सक ह& और म`न सव कaनत व द क इस सबध म# ह.न क सबध म# भ पनतव द गर क ओर स अपन जव बद व@ म# लशम त भ असभवचन नह सल ग हj। पत र स.1 व द क इन असभवचन@ क क.ई सपष खण>न भ असभलख पर नह ह& कक उपककर द र स सबचधत कaत क. उसन न त. सव कaत कक ह&, न ह इस सबध म# सहमनत द ह& और न ह उसन पनतव द स.1 क इस कaत क. वव कक ह&। ऐस पररजसरनत @ म# इस सदभ म# ज. भ तक वव. अचधवक अप ल र द र सल ग ह&, व पLरत असभलख स हटकर सल ग तक ह& ओर म त 15-16 स ल@ स ककस व जकत क प स ननरनतर कबज रहन क आध र पर ह नह म न ज सकत कक भ-L सव म न मLल ककर द र क. पररसर सबचधत क. उपककर द र पर दन अरव उसक कबज प ट ववर करन क अनम 3 नत पद न कर द ह& । इस सबध म# अप ल र क सलए सक र तमक स क पश करन आवश क र , लककन उसक ओर स क.ई स3दढ स क इस सबध म# पश ह नह क ग ह& और न ह इस ब बत असभवचन सल ह& । अत: इन पररजसरनत @ म# वव. अ. अप ल र क उक तक सव क र कक जन .ग नह ह& । 19. वव. अ. न ल न पसत3त स क एव ववचध क समग रप स वववचन करत ह3ए इस पकरर म# पनतव द स.1 मLल ककर द र द र पनतव द स.2 क. ववव ददत पररसर S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 7 of 19 उपककर द र पर दन एव उसक कबज प टववर करन स बबत म न ह& । हम र ववनम मत म# उनक मत उप 3क वववचन क आध र पर पLरत: तथ त: एव ववचधत: ह& , जजसक प3वष क ज त ह& और इस तनक क ननर व द -पत र स.1 क पक म# एव अप ल र -पनतव द स.1 एव पनतव द स.2 पत र स.2 क ववरद कक ज त ह& ।" 3. The learned trial court had decreed the suit of the plaintiff/respondent and granted the eviction decree vide the judgment and decree dated 09.02.1998. The operative and relevant portion of the judgment and decree dated 09.02.1998 of the trial court is quoted herein below: - “ .ग अचधवक पनतव द स.1 क पम3ख आपवl ह रह ह& कक चकक L व दगसत कमर व वस न क प .जन क सल ककर पर दद ग र , अत: र जसर न ककर द र क नLन क ध र 14 (3) क अनतगत ककर पर दन क प च वष क अवचध तक बदखल क व द पसत3त नह कक ज सकत । हम र ववनम र म# जह तक ककर द र क नLन क ध र 14 (3) सबध आपवl क पश ह& त. ह स रह न ह&, सव कaत त`र पर ककर द र म`रखक र , चLकक क.ई भ ड चचट नह सलख ग , इससल ह सपष त`र पर नह कह ज सकत कक व दगसत कमर व प ररक प .जन क सल दद ग ह., अरव ननज रहव स क सल क @कक इस सबध म# पत वल पर आ सक क वववचन स ह जसरनत सपष ह.त ह& कक चLकक व दगसत कमर क सम प ह ड>लकस रसट ह उस चल ज रह ह&, तर ववव दगसत कमर इस रसट ह ऊस क नजद क ह जसरत ह&, अत: ह नह मन ज सकत कक कमर इस रसट ह उस क सल ककर पर सल ग ह., क @कक > > 1 न ब न@ बत ह& कक रसट ह उस क 36-37 कमर हj, स म न उपध रर ह नह कह ज सकत कक व दगसत कमर रसट ह उस क व वस क सल दन इससल आवश क रह ह. क @कक न त. रसट ह उस क S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 8 of 19 म3 ख भवन म# जसरत ह& ख और न ह ह सपष बत ग ह& कक इस रसट ह उस म# ग हक@ क ठहरन क सल प .ग म# सल ग ह., बजKक ह अचधक सभ वन पत त ह.त ह& कक इस भगव नद स क ननज रहव स क सल ककर पर सल ग ह& , इसक अनतररक व द द र पसत3त न न क दष नत > एन ज (र जसर न) 1996 पज 539 म# ह सपष रप स पनतप ददत कक ग ह& कक पररसर रहव स हत3 ककर पर सल ग ह., ककनत3 ब द म# उस व वस न क प .जन र क म म# लन शर 3 कर दद ह., और इस ब बत भLसव म म# क.ई अन3मनत नह ल ग ह., त. ध र 14 (3) ककर द र क नLन क प वध न ल गL नह ह.त ह& । पसत3त पकरर म# भ ह सभ वन पत त ह.त ह& कक व दगसत कमर ननज रहव स क सल ककर पर सल ग र , ब द म# इस व वस न क प .जन र पररवनतत कर दद अत: उक आपवl भ चलन .ग नह ह&, जह तक पनतव द स.2 क सबलट प टववर पजशन करन क पश ह& त. इस सबध म# ककर द र अचधनन म 1950 म# दद ग उपककर द र क पररभ ष क अध न कर# त. ह पकट ह.त ह& कक उपककर द र तभ ज न ज सकत ह& जबकक मLल ककर द र द र व दगसत पररसर क अनन कबज उपककर द र क. सoप दद ग ह. तर इस ब बत भL- सव म स इज जत नह ल ग ह., और बदल म# उपककर द र स कनतपLनत अरव ककर वसLल कक जत ह., तर दद कबज परL तरह स उप .ग, उपभ.ग क सल इस रप म# उप ककर द र क. सoप दद ग ह., जजसस कक अन व डक क उस पर अचधक र सम प ह. ज त. उस प टववर पजसन कह ज सकत ह& । पसत3त पकरर म# सव कaत त`र पर पनतव द स.2 क. व दगसत कमर सoप ग ह&, ह ल@कक 8/- रप र.ज ककर दन ब बत असभवचन न त. जव ब द व म# कक ग ह& और न ह जरर सश.धन इस ज.ड ग ह&, और पनतव द गर द र असभवचन@ म# कक ग करन@ स पर ज कर 8/- र.ज S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 9 of 19 ककर दन क कह न बबKक3ल न बन ग ह&, जबकक ववचध क ह स3सर वपत ससद नत ह& कक क.ई भ पकक र अपन असभवचन@ म# कक ग करन@ क प3वष म# ह ब न द सकत ह& , व अपन असभवचन@ स पर ज कर नह स क द सकत ह& , और न ह ऐस द ग सक क क.ई स जक क मL K ह.त ह&, पनतव द गर द र बन ग कह न क. दद सच भ म न सल ज त. भ उसक करन असत प ज त ह& , क @कक सव पनतव द गर क म3त बबत गत 15-16 वषe स कमर पनतव द स.2 अपन वक त क प .ग म# उसम# क ल चल त ह&, जजसक प3वष उसक ववजजदटग क > पदश 5 स ह.त ह&, स म न त ककस रसट ह उस ह.टल म# पररसर स समत अवचध क सल कमर रहव स क सल ककर पर दद ज त ह& । रसट ह ऊस ह.टल क कमर क ल क प .ग क सल व वस क प .ग क सल नह दद ज सकत , सव > > 1 क ब न@ म# ह सपष आ ह& कक व दगसत पररसर क कबज पनतव द सख 2 क. सoप दद ग ह& उसक बक द रस द दकर ककर सल ज त ह&, ककनत3 न त. उसन क.ई रस द ब3क पसत3त क और रजजसटर म# ककर दत सम इनद ज करव ग ह&, ककनत3 ऐस क.ई रजजसटर पसत3त नह कक ग ह&। सव > > 1 न अपन जजरह म# ह सव क र कक ह& कक ककर दन क अवचध त न नह करत हj, ककनत3 उक अवचध म# द. ददन, दस ददन पनदह ददन उसस अचधक क ह. सकत ह&, ककनत3 पनतव द गर द र उक अवचध 15-16 वषe क ददख ग ह&, जव ब द व म# इस ब त क. क @ नह सलख ग इसक क.ई क रर > > 1 न नह बत ह&, तर ह तथ ह स सपद ह& कक व दगसत पररसर क ककर 125/- म हव र सल ग ह& जबकक 8/- हर र.ज क दहस ब स म न ज व त. वह 240/- ककर पनतव द स.2 स पनतव द स.1 प प करत ह& , इस पक र 115/- रप पनतम ह ल भ ककर द र पनतव द स.1 सव कaत रप कम त ह&, ज. कक अपन आप म# ह स सपद एव आश जनक ह& , > > 2 न सव क र कक ह& कक 15-16 S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 10 of 19 वषe स कमर म# वक ल अपन क ल चल त ह&, ज. ककर दद जत ह&, उस ब बत ह.टल रजजसटर म >ल इनद ज नह कक ज त ह& । इस पक र ह सपष ह& कक पनतव द स.2 क न3न रप स व दगसत पररसर पर क बबज ह&, और अपन वक लत क व वस चल रह ह&, उक उपककर द र बग&र व द क अनम 3 नत स क म क ग ह&, अन व डक क. इस पर क.ई अचधक र नह ह&, अत: ह तथ सक म# सपष ह& कक व दगसत पररसर वतम न म# पनतव द स.1 क कबज म# परL तरह नह ह&, ऐस अवसर म# एक महतवपLर न न क दष नत > एन ज 1996 (र जसर न) पज 461 ववषर3 टड>ग कमपन बन म म.त चद म# पनतप ददत ससद नत क अन3सरर म# पLर तरह स बबत ह& कक पनतव द स.1 द र पनतव द स.2 क. कबज प टववर घ.वषत कक ग ह&, व उपककर द र क म क ग ह&, ववचध क ह स3सर वपत ससद नत ह& कक उपककर द र क. ससद करन क भ र प रमभ म# भ-L सव म पर ह.त ह& , ककनत3 ब द ह भ र ककर द र पर आ ज त ह& कक वह इस आर.प क ख>न कर#, ककनत3 पनतव द गर द र इस आर.प क असभवचन@ स पर ज कर बबKक3ल न कह न बन कर ख>न कक ग ह&, ज. सव क र .ग नह ह&, अत: उक ववव दक बहक व द ववरद पनतव द ननररत कक जत ह& ।" 4. The present second appeal was admitted by this Court on 06.08.2012 and the following substantial questions of law were framed for consideration:

1. Whether eviction decree could be passed by the courts below on the ground of subletting in favour of defendant No.2 Suresh Kumar Sharma, Advocate, one of the rooms in the premises comprising of 38 rooms which was given to the appellant tenant firm M/s Delux Rest House, Station Road, Bikaner, and the S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 11 of 19 very business of appellant firm was to give on rent the rooms in the said guest house and whether the period of occupation of defendant No.2 in one of the rooms of these premises in consonance with the nature of business of the appellant can still furnish to the landlord a ground of subletting for eviction of the appellant-tenant from that very room of the Guest House?.

2. Whether there was any second default on the part of the appellant-tenant in payment of rent to the plaintiff and whether the eviction decree was liable to be passed on that ground?.

5. Mr. Varun Gupta, learned counsel for the appellant/defendant submitted that the premises in question was let out by the landlord to the defendant firm (Delux Rest House) for extension of its rest house business and since the “hotel”. does not fall within the definition of “premises”. as defined under the provision of Act of 1950, therefore, the eviction suit was not even maintainable and the room in question was given to respondent No.2, Suresh Kumar Sharma, Advocate on daily licence basis and the same cannot be said to be a sub-letting on the part of the defendant/tenant, but it would be the part of business activity of the defendant firm. He thus argued that the learned courts below have erred in granting the eviction decree on the ground of subletting and, therefore, the first substantial question of law deserves to be answered in favour of tenant/appellant. In support of his contentions, learned counsel for the appellant relied upon the decision of this S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 12 of 19 Court in the case of Bhup Singh Vs. Rent Tribunal & Ors. reported in 2013 (2) DNJ Raj.

902. 6. As far as second default on the part of the appellant/tenant in payment of rent is concerned, learned counsel for the appellant/defendant argued that there was no finding of the courts below about the second default in payment of rent and, therefore, the eviction decree on that ground cannot be sustained.

7. On the other hand, Mr. Hemant Balani and Mr. V.D. Vaishnav, learned counsel appearing on behalf of respondent No.1/plaintiff/landlord supported the impugned judgment and decree of eviction and relied upon the judgment of Hon'ble the Supreme Court in the case of E. V. Mathal Vs. The Subordinate Judge, Kottayam & Ors. reported in AIR1970SC337and in the case of Associated Hotels of India Ltd. Vs. R.N. Kapoor reported in AIR1959SC1962 Learned counsel for the respondent No.1/plaintiff submitted that the premises in question was let out to the defendant, M/s Delux Rest House, for residential purpose of the owner under an oral tenancy and not for business purposes, which was a separate building and his own premises. The present eviction suit was filed seeking eviction on the ground that the defendant/tenant has sublet the said suit premises (room) to the defendant No.2, namely, Suresh Kumar Sharma, Advocate and so also default in payment of rent. Learned counsel for the respondent No.1/plaintiff further submitted that the learned courts below have rightly granted the eviction decree on the ground of sub-letting, which do not raise any substantial question of law and, therefore, the substantial questions of law S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 13 of 19 framed above, deserve to be answered in favour of plaintiff/landlord and the present appeal of the defendant deserves to be dismissed.

8. He also submitted that Hon'ble Apex Court in the case of E.V. Mathal (supra) has held that where the lawyer in the premises had set up his office and had taken a telephone connection in his own name, therefore, it cannot be said that the premises was given on licence on day-to-day basis and, therefore, the ground of subletting was thus established. The relevant para 5 of the said judgment is quoted herein below for ready reference: -

“5. Lastly, Mr. Dapthary argued that on the facts the Courts below should not have come to the conclusion that there was a sub-letting within the mischief of the Act. The buildings were let out as a lodging house and the evidence showed that one of the rooms was in the occupation of a lawyer who had been there for years and had put up his name board outside the room. Besides the name board of the laywer, there were the name boards of other persons and the lawyer paid rent on a daily basis. The lawyer had installed a telephone in his room. In our opinion, there was sufficient evidence to hold that the lawyer was in exclusive possession of the room and although the rent was paid on a daily basis it was not a case of the grant of a licence. In any event, the finding as to sub-letting does not call for interference in this case seeing that the District Court and the High Court both accepted the evidence as conclusive of sub-letting.”. 9. Relying upon the judgment in the case Associated Hotels of India Ltd. (supra), learned counsel for the S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 14 of 19 plaintiff/respondent No.1 submitted that the room in hotel cannot be construed in strict literal sense and a room in the hotel must fulfil two conditions viz. (1) it must be part of a hotel in the physical sense and (2) its user must be connected with the general purpose of the hotel of which it is a part. Learned counsel for the respondent No.1/plaintiff submitted that in the present case, the premises in question was not the part of rest house, but was in a separate building, situated near the said rest house and was given to the defendant for residential purpose, which was in fact let out by the defendant No.1 to the defendant No.2, Suresh Kumar Sharma, Advocate for setting up his office there. The relevant portion of the judgment of the Apex Court in the case of Associated Hotels of India Ltd. (supra) is quoted herein below for ready reference: - “It would be doing violence to the context if the expression 'room in a hotel' in S. 2 (b) is interpreted in a strictly literal sense. A room in a hotel must fulfill two conditions: (1) it must be part of a hotel in the physical sense and (2) its user must be connected with the general purpose of the hotel of which it is a part. A modern hotel provides many facilities to its residents like billiard rooms, post office and banking facilities by letting out rooms in the hotel for that purpose. A barber's shop within the hotel premises is no exception. The circumstances that people not resident in the hotel might also be served by their hair dresser does not alter the position; it is still an amenity for the residents in the hotel to have a hair dressing saloon within the hotel itself. Where the spaces in a clock S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 15 of 19 room in the hotel premises are let out for carrying on the business of a hair dresser and such a business was one of the amenities which a modern hotel provides, the rooms in questions are rooms in a hotel within the meaning of S. 2 (b) and the tenant is not entitled to ask for fixation of fair, or standard rent for the same.”. 10. Having heard the learned counsel for the parties, and upon perusal of the judgments cited at bar, and the reasons assigned by the learned court below, this Court is satisfied that the substantial question of law No.1, framed above, deserves to be answered in favour of plaintiff/landlord/respondent No.1 and against the appellant/defendant/tenant. The factum of suit premises in question being not the part of Rest House was well proved by the plaintiff/landlord. There was no written agreement between the parties and the “room”. in question was not let out for the purposes of Rest House or Hotel, therefore, it cannot be assumed to the the part of rest house or for the extension of business activities of the Rest House of the defendant firm. The appellant/defendants has miserably failed to prove and establish before the courts below that the suit premises was not sublet to the defendant No.2, Suresh Kumar Sharma, Advocate and the fare or rent was charged from the defendant No.2 on day to day basis. On the contrary, the plaintiff/landlord has clearly proved that the suit premises was let out to the defendant No.2, who had set up an office in that premises.

11. In view of aforesaid findings of facts that the premises in question was not the part of the rest house/hotel itself, the argument sought to be raised by the learned counsel for the appellant/tenant S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 16 of 19 that the suit premises was taken on rent for business purposes and not for residential purpose, cannot be accepted and the provisions of Act of 1950 will apply to the premises in question. The ground of sub-letting was well proved because letting out of premises to an advocate, was not the part of business activity of the firm. The exclusion of hotel room from the definition of “premises”. in the Act of 1950 would not apply in the present case. The said definition is also quoted herein below: - “Premises”. means- (a) any land not being used for agricultural purposes; and (b) any building or part of a building (other than a farm building) let or intended to be let for use as a residence or for commercial use or for any other purpose, including - (i)the gardens, grounds, godowns, garages and out-houses, if any, appurtenant to such building or part, (ii)any furniture supplied by the landlord for use in such building or part, (iii)any fittings affixed to, and amenities provided in, such building or part for the more beneficial enjoyment thereof, and (iv)any land appurtenant to and let with any such building or part, but does not include a room or other accommodation in a hotel, dharamshala, inn, sarai, lodging house, boarding house or hotels; S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 17 of 19 Explanation: In absence of a contract to the contrary, the top of the roof shall not form part of the premises let out to a tenant.”. 12. The exclusion of premises or other accommodation in the hotel would not apply in the present case because the tenancy although was orally created in favour of M/s Delux Rest House, and the said firm was only arrayed as party defendant in the suit in the name of Firm Delux Rest House but the room (suit premises) was in the building near the said Rest House and the same was not given for the business purposes and was given for residential purpose of the owner of the Rest House only. The defendant No.1/tenant, however, sublet the same to the defendant No.2, Suresh Kumar Sharma, an Advocate, which was a fact well proved and established by the plaintiff giving rise to the ground of eviction.

13. Both the courts below have concurrently found that the factum of subletting has been established by the plaintiff/landlord, which calls for no interference by this Court as there is no contra material available on record to take a different view. So far as the other ground of second default in payment of rent is concerned, in view of first substantial question of law, answered in favour of the landlord, the second question of law need not be answered since even one of the ground established under Section 13 of the Act of 1950, can be upheld and decree on that basis can be sustained.

14. Accordingly and in view of above, the substantial question of law framed above is answered in favour of plaintiff/landlord/respondent No.1 and against the appellant/tenant, S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 18 of 19 and it is held that since the suit premises i.e. the room situated in a separate building other than the Rest House, was not the part of the hotel/Rest House of the defendant, therefore, the eviction decree granted by the courts below on the ground of subletting to the defendant No.2, Suresh Kumar Sharma, Advocate is liable to be upheld, the same is, accordingly, upheld.

15. Consequently, the present second appeal filed by the appellant/defendant/tenant is dismissed with costs of Rs.5000/- to be paid by the defendant to the plaintiff within three months from today.

16. The appellant/defendant/tenant including the sub- tenant, shall hand over the peaceful and vacant possession of the suit premises to the plaintiff/landlord/respondent No.1 within a period of six months from today i.e. on or before 08.03.2016 and shall pay mesne profit @ Rs.5,000/- per month commencing from October, 2015 and will further continue to pay the mesne profit each month by 15th day of the next succeeding month or in advance to the plaintiff/resondent No.1, also and in case there is any default in payment of mesne profit, the period granted for eviction shall stand reduced and the decree of eviction would become executable forthwith. The appellant/defendant/tenant shall also clear all the arrears of rent and mesne profit and pay the same to the plaintiff/respondent No.1, within three months from today, otherwise the same will bear interest @ 9% per annum. The appellant/tenant shall also not sub-let, assign or part with the possession of the suit shop or house any part thereof in favour of any one else and would not create any third party interest in the same during the aforesaid S.B. Civil Second Appeal No.208/2009 Firm Delux Rest House Vs. Prem Kumar & Anr. Judgment, Tuesday, 08/09/2015 19 of 19 period and if it is so done, the same would be treated as void and such third parties will also be bound by this decree. The appellant- defendant shall furnish a written undertaking incorporating the aforesaid conditions in the trial court within three months from today, and one copy thereof along with affidavit, in this Court. It is made clear that if the peaceful and vacant possession of the suit premises is not handed over to the plaintiff/respondent No.1/landlord on or before 08.03.2016 or mesne profits are not paid as directed above, besides the expeditious execution of the decree in normal course, the plaintiff/respondent No.1 shall also be entitled to invoke the contempt jurisdiction of this Court. A copy of this judgment be sent to both the learned courts below and both the parties forthwith. (Dr. VINEET KOTHARI), J.

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